नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा अनियमितता विवाद को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा जांच अधिकारी और डीएसपी को पत्र लिखकर विपक्षी नेताओं को पूछताछ के लिए बुलाने की मांग के बाद कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने VHP के इस कदम को “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” करार देते हुए कहा कि जिस संगठन पर पहले से गंभीर आरोप लगते रहे हैं, वही अब सवाल उठाने वालों को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
राम मंदिर में कथित चंदा अनियमितता को लेकर हाल के दिनों में विवाद गहराया है। इसी बीच VHP ने जांच एजेंसियों को पत्र लिखकर मांग की कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित उन विपक्षी नेताओं को बुलाया जाए, जिन्होंने सार्वजनिक मंचों से चंदे में कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। VHP का कहना है कि यदि विपक्ष के पास आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
कांग्रेस का तीखा हमला
VHP के इस पत्र के सामने आने के बाद कांग्रेस ने संगठन और भाजपा पर सीधा हमला बोला। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि VHP का यह कदम पूरी तरह राजनीतिक है और इसका उद्देश्य असली मुद्दे से ध्यान भटकाना है।
उन्होंने कहा कि जिस VHP पर पहले भी निर्मोही अखाड़ा द्वारा राम मंदिर से जुड़े वित्तीय मामलों में गंभीर आरोप लगाए गए थे, वही अब विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। उन्होंने इसे “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” जैसी स्थिति बताया।
ट्रस्ट और सरकार पर उठाए सवाल
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार के कार्यकाल में हुआ था। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय VHP से जुड़े रहे हैं और ट्रस्ट के संचालन से जुड़े कई लोग सरकार एवं संघ परिवार से जुड़े हैं। ऐसे में विपक्षी नेताओं को इस मामले से जोड़ना समझ से परे है।
उन्होंने सवाल किया कि जब केंद्र और उत्तर प्रदेश दोनों जगह भाजपा की सरकार है तो फिर कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी विपक्ष पर कैसे डाली जा सकती है।
‘श्रेय भी लिया, जवाबदेही से भी बच रहे’
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा ने राम मंदिर निर्माण का पूरा राजनीतिक श्रेय लिया, लेकिन अब जब ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं तो पार्टी चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और VHP वास्तव में पारदर्शिता चाहते हैं तो उन्हें पहले अपने संगठन और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग करनी चाहिए।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि वर्तमान जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है और इससे सच्चाई सामने आने की उम्मीद कम है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
कांग्रेस ने एक बार फिर पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग दोहराई। पार्टी का कहना है कि केवल निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच से ही आरोपों की सच्चाई सामने आ सकेगी और श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रहेगा।
VHP का क्या कहना है?
विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर के चंदे को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में यदि उनके पास कोई साक्ष्य हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। VHP का दावा है कि उसका पत्र इसी उद्देश्य से लिखा गया है ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और सच सामने आए।
फिलहाल क्या स्थिति है?
राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर जांच जारी है। इस मामले में अलग-अलग पक्ष अपने-अपने दावे और आरोप सामने रख रहे हैं। अभी तक किसी भी जांच एजेंसी द्वारा कथित वित्तीय अनियमितताओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में मामले की अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

