नई दिल्ली। फ्रांस में जून 2026 में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात में मीडिया की भूमिका को लेकर उठे विवाद पर भारत सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। सरकार के सूत्रों ने कहा है कि शीर्ष नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों और मीडिया व्यवस्था को लेकर पहले से चर्चा करना VVIP दौरों में सामान्य प्रोटोकॉल का हिस्सा है।
अमेरिकी राजदूत के बयान से शुरू हुआ विवाद
विवाद तब सामने आया जब भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया कि मोदी-ट्रंप मुलाकात से पहले भारतीय पक्ष ने मीडिया से सवाल-जवाब नहीं कराने की इच्छा जताई थी। गोर के मुताबिक, उन्होंने यह बात तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप तक पहुंचाई थी।
गोर ने बताया कि बैठक के दौरान दोनों नेताओं के शुरुआती संबोधन के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से सवाल लेने शुरू कर दिए। उनके अनुसार, इसके बाद मीडिया इंटरैक्शन करीब 45 मिनट तक चला।
भारत सरकार ने क्या कहा?
भारत सरकार से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया कि किसी भी VVIP दौरे से पहले नेताओं की सार्वजनिक उपस्थिति को लेकर व्यवस्थाओं पर चर्चा करना नियमित प्रक्रिया है। भारतीय पक्ष ने भी ऐसे दौरों के लिए अपनाई जाने वाली अपनी मानक प्रक्रिया के बारे में संबंधित पक्ष को जानकारी दी थी।
सरकार के मुताबिक, इस तरह की बातचीत का उद्देश्य कार्यक्रम की रूपरेखा, सार्वजनिक उपस्थिति और व्यवस्थाओं को लेकर दोनों पक्षों के बीच स्पष्टता बनाए रखना होता है। इसलिए इसे किसी एक व्यक्ति या विशेष बैठक के लिए अपनाई गई असामान्य व्यवस्था के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
मोदी-ट्रंप मुलाकात को क्यों मिली अहमियत?
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की यह मुलाकात फ्रांस के एवियन-ले-बैं में 17 जून 2026 को G7 शिखर सम्मेलन से इतर हुई थी। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई थी।
मीडिया की मौजूदगी और सवाल-जवाब को लेकर सामने आए दावे के बाद अब भारत की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि VVIP बैठकों में सार्वजनिक कार्यक्रमों से जुड़ी व्यवस्थाओं पर पहले से समन्वय करना सामान्य राजनयिक और प्रशासनिक प्रक्रिया है।

