नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ सलाहकार मोहम्मद रज़ा नकदी ने संकेत दिया है कि तेहरान जरूरत पड़ने पर युद्ध को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के अंत तक खींच सकता है। उनका कहना है कि लंबे संघर्ष का मकसद दुश्मनों को ईरान पर हमला करने की भारी कीमत चुकाने पर मजबूर करना और भविष्य में हमले की संभावना को रोकना है।
‘दुश्मनों को हमले की कीमत चुकानी होगी’
मोहम्मद रज़ा नकदी के बयान से संकेत मिलता है कि ईरान लंबी लड़ाई के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। उनका तर्क है कि संघर्ष को लंबा खींचकर अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बढ़ाया जा सकता है और भविष्य में ईरान पर सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए प्रभावी प्रतिरोधक क्षमता तैयार की जा सकती है।
ट्रंप का दावा- ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूरा नियंत्रण’
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका का इस रणनीतिक जलमार्ग पर ‘टोटल कंट्रोल’ है। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को ‘वॉल ऑफ स्टील’ बताते हुए कहा कि ईरान के पास इसे चुनौती देने की क्षमता नहीं है।
हालांकि, ट्रंप के इस दावे के बीच समुद्री आवाजाही अभी भी सामान्य नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में काफी कम बनी हुई है।
अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत भी अटकी
संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को फिर से लागू करने की कोशिशों में भी फिलहाल कोई खास प्रगति नहीं हुई है। दोनों पक्ष होर्मुज जलडमरूमध्य और अमेरिकी नाकाबंदी समेत कई मुद्दों पर एक-दूसरे की शर्तें मानने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।
ऐसे में एक तरफ ईरान की ओर से लंबे संघर्ष के संकेत और दूसरी तरफ ट्रंप का होर्मुज पर नियंत्रण का दावा पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव के साथ-साथ कूटनीतिक प्रयासों पर भी दुनिया की नजर रहेगी।

