Tuesday, July 21, 2026
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हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने साय सरकार से मांगा जवाब, सुशील आनंद शुक्ला बोले- स्कूलों में मंत्रोच्चार अनिवार्य है या नहीं, सरकार करे स्पष्ट

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में प्रार्थना और भोजन के दौरान मंत्रोच्चार को लेकर जारी विवाद के बीच प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद सरकार को यह साफ करना चाहिए कि क्या स्कूलों में मंत्रोच्चार को अनिवार्य बनाने का कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया है या नहीं।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि अदालत में हुई सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि सरकार की ओर से ऐसा कोई ठोस दस्तावेज या आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि सरकारी स्कूलों में प्रार्थना, भोजन मंत्र या अन्य मंत्रों का पाठ अनिवार्य किया गया है। ऐसे में सरकार को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि मीडिया में प्रसारित हो रहा कथित आदेश वास्तविक है या केवल भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है।

भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में वैचारिक हस्तक्षेप कर रही है। उनका कहना था कि सरकारी स्कूलों में दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, भोजन मंत्र, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र जैसे धार्मिक पाठों को अनिवार्य बनाने की कोशिश संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सरकारी स्कूलों को वैचारिक रूप से प्रभावित करने का प्रयास कर रही है।

संविधान का भी दिया हवाला

सुशील आनंद शुक्ला ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28(1) का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्णतः राज्य वित्तपोषित शिक्षण संस्थानों में किसी विशेष धर्म की शिक्षा या धार्मिक प्रार्थना आयोजित नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि अनुच्छेद 28(3) के अनुसार राज्य से सहायता प्राप्त संस्थानों में किसी भी छात्र को उसकी या उसके अभिभावकों की सहमति के बिना धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब

कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह आधिकारिक रूप से बताए कि स्कूलों में मंत्रोच्चार को लेकर उसकी वास्तविक नीति क्या है। पार्टी का कहना है कि यदि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है तो सरकार को भ्रम दूर करना चाहिए, और यदि जारी किया गया है तो उसका कानूनी आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

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