नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने को लेकर नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता ने दोनों देशों के सहयोग को नई गति देने की संभावनाओं को बल दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बैठक के दौरान रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पक्षों ने कई सहयोग समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए, जिनका उद्देश्य तकनीकी नवाचार, आर्थिक विकास, निवेश और रणनीतिक सहयोग को विस्तार देना है। हालांकि, समझौतों का अंतिम आधिकारिक विवरण संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से जारी किया जाना बाकी है।
बैठक के दौरान भारत-जापान संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और पारस्परिक विश्वास को दोनों देशों की साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत बताया गया। दोनों पक्षों ने मुक्त, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों पर सहयोग को भविष्य की प्राथमिकता बताते हुए दोनों देशों ने अनुसंधान, नवाचार, प्रतिभा विकास और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल क्षमता वैश्विक नवाचार को नई दिशा दे सकती है।
रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सकारात्मक चर्चा हुई। रिपोर्टों के अनुसार, रक्षा प्रौद्योगिकी, संयुक्त अनुसंधान, समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग सहयोग और सैन्य अभ्यासों को और मजबूत करने पर सहमति बनी। इसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसके अलावा व्यापार, निवेश, हरित ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), डिजिटल कनेक्टिविटी और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी दोनों पक्षों ने विस्तार से विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत और जापान के बीच बढ़ता सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता, आर्थिक विकास और वैश्विक रणनीतिक संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

