रायपुर, 1 जुलाई: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी (नवा रायपुर) गांव में अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए प्रशासन द्वारा करीब 80 मकानों को ढहाए जाने के बाद बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो गए हैं। इस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस के दो विधायकों ने बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए इस परियोजना के तहत मिलने वाले अपने सरकारी आवास को लेने से साफ इनकार कर दिया है।
कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया और कहा:
भारी पुलिस बल के बीच चली जेसीबी
सोमवार को नकटी गांव में राजस्व विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।
- प्रशासन का पक्ष: अधिकारियों का कहना है कि जिस भूमि पर मकान बने थे, वह पूरी तरह सरकारी जमीन थी और लंबे समय से उस पर अवैध कब्जा था। कार्रवाई से पहले सभी संबंधित लोगों को नियमानुसार नोटिस दिए गए थे और कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई थी।
- ग्रामीणों का दावा: दूसरी ओर, प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि वे कई दशकों से इस जमीन पर रह रहे थे। उनका गंभीर आरोप है कि जिन मकानों को तोड़ा गया, उनमें से कुछ तो ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत ही बनाए गए थे।
मलबे के ढेर पर बिखरा आशियाना, बारिश में बढ़ीं मुश्किलें
बुलडोजर कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों ने तीखा विरोध प्रदर्शन किया। कुछ लोग मशीनों के सामने भी अड़ गए, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने ऐन बारिश के मौसम में उन्हें बेघर कर दिया है, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को खुले आसमान के नीचे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन का दावा: पुनर्वास की व्यवस्था जारी
विवाद बढ़ता देख प्रशासन ने विस्थापितों के लिए राहत के दावे किए हैं। अधिकारियों के अनुसार:
- प्रभावित परिवारों को नवा रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस (EWS) आवासों में बसाने की तैयारी की गई है।
- प्रभावितों के लिए भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और सामान शिफ्ट करने के लिए विशेष परिवहन की व्यवस्था की गई है।
‘विकास बनाम गरीब’: आमने-सामने सरकार और विपक्ष
इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर ‘गरीब विरोधी’ होने का आरोप लगाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि विकास और वीआईपी कॉलोनियों के नाम पर गरीबों के घर उजाड़ना कतई उचित नहीं है, सरकार को पहले उनका ठोस पुनर्वास सुनिश्चित करना चाहिए था। वहीं, सरकार का रुख साफ है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी है और किसी भी पात्र परिवार के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
नकटी गांव की यह बुलडोजर कार्रवाई अब महज एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सियासत का सबसे बड़ा संवेदनशील मुद्दा बन चुकी है।

