रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पहली कक्षा (Class 1) में प्रवेश के लिए बच्चे की न्यूनतम आयु 6 वर्ष अनिवार्य होगी। बच्चे की आयु का निर्धारण प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को आधार मानकर किया जाएगा।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, जिन बच्चों की आयु 1 अप्रैल तक 6 वर्ष पूरी नहीं होती, लेकिन 1 जुलाई तक 6 वर्ष हो जाती है, उन्हें विशेष परिस्थितियों में अधिकतम तीन महीने की छूट देकर प्रवेश दिया जा सकेगा। यह प्रावधान उन विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जो आयु सीमा से मामूली अंतर के कारण प्रवेश से वंचित हो सकते हैं।
शिक्षा सत्र भी होगा राष्ट्रीय कैलेंडर के अनुरूप
राज्य सरकार ने शिक्षा सत्र में भी बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। आगामी शैक्षणिक वर्ष से छत्तीसगढ़ में भी अन्य प्रमुख शिक्षा बोर्डों की तरह 1 अप्रैल से 31 मार्च तक शैक्षणिक सत्र संचालित किया जाएगा। यह व्यवस्था राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगी।
NEP-2020 के अनुरूप लागू होंगे नए नियम
सरकार का कहना है कि यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को उचित आयु में औपचारिक शिक्षा से जोड़ना, उनके बौद्धिक एवं मानसिक विकास के अनुरूप सीखने का वातावरण तैयार करना और राज्य की शिक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है।
अभिभावकों और स्कूलों को मिलेगी स्पष्ट व्यवस्था
नए नियम लागू होने के बाद स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और एकरूप होगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि आयु सीमा और शिक्षा सत्र में एकरूपता आने से अभिभावकों, विद्यार्थियों और स्कूल प्रबंधन सभी को सुविधा मिलेगी। साथ ही, राज्य की शिक्षा व्यवस्था राष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जा रहे मानकों के अनुरूप संचालित हो सकेगी।
शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों को नए दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आगामी शैक्षणिक सत्र से राज्यभर में इन्हीं नियमों के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जाएगी।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi

