चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। लगभग नौ वर्षों तक द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा रही मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (MDMK) ने अब गठबंधन से अलग होने का फैसला कर लिया है। पार्टी के संस्थापक और वरिष्ठ नेता वैको ने घोषणा की कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) का समर्थन करेगी। इस फैसले को राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
यह निर्णय चेन्नई में आयोजित MDMK की 32वीं जनरल काउंसिल बैठक में लिया गया, जिसमें राज्यभर से 1,466 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान पार्टी की राजनीतिक रणनीति, वर्तमान गठबंधन की स्थिति और भविष्य की चुनावी दिशा पर विस्तार से चर्चा हुई। विचार-विमर्श के बाद अधिकांश प्रतिनिधियों ने DMK गठबंधन से अलग होने का समर्थन किया, जिसके बाद पार्टी ने सर्वसम्मति से गठबंधन छोड़ने का फैसला किया।
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए वैको ने कहा कि MDMK अब DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी आगामी विधानसभा उपचुनाव नहीं लड़ेगी, बल्कि TVK के उम्मीदवारों का समर्थन करेगी। साथ ही स्थानीय निकाय चुनावों में भी MDMK, TVK के साथ मिलकर चुनावी रणनीति अपनाएगी।
वैको ने अपने संबोधन में TVK के नेतृत्व और उसकी कार्यशैली की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि TVK ने भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है तथा साफ-सुथरे प्रशासन की दिशा में काम किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य में राजनीतिक बदलाव की आवश्यकता है और MDMK का यह फैसला जनता की भावनाओं तथा पार्टी कार्यकर्ताओं की राय को ध्यान में रखकर लिया गया है।
MDMK का DMK गठबंधन से अलग होना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी पिछले कई वर्षों से DMK के साथ चुनाव लड़ती रही है। ऐसे में इस फैसले से राज्य की राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्षी दलों के बीच नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है और आगामी चुनावों में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
TVK, जिसने हाल के वर्षों में तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, उसे MDMK का समर्थन मिलने से राजनीतिक मजबूती मिल सकती है। वहीं, DMK के लिए यह घटनाक्रम चुनावी रणनीति के लिहाज से एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

