भोपाल: मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक और वैचारिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने कहा कि संघ की विचारधारा लगातार विस्तार कर रही है, लेकिन समाज में अच्छे, ईमानदार और संस्कारवान लोगों की कमी चिंता का विषय बन गई है।
“संघ का नाम लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी”
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि केंद्र और राज्यों में भाजपा की सरकार बनने के बाद बड़ी संख्या में लोग खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा बताने लगे हैं। उनके मुताबिक, पहले जो लोग संघ से दूरी बनाए रखते थे, वे अब स्वयं को वर्षों पुराना स्वयंसेवक बताने का दावा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कई प्रशासनिक अधिकारी भी व्यक्तिगत बातचीत के दौरान यह जताने की कोशिश करते हैं कि उनका परिवार लंबे समय से संघ की विचारधारा से जुड़ा रहा है। विजयवर्गीय ने एक अधिकारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने उनसे कहा था कि उनके पिता शाखा प्रमुख रहे हैं। यह दर्शाता है कि आज संघ से जुड़ाव बताना कई लोगों के लिए पहचान का माध्यम बन गया है।
“केवल संख्या बढ़ना पर्याप्त नहीं”
भाजपा नेता ने कहा कि किसी भी संगठन की ताकत केवल उसकी बढ़ती सदस्य संख्या से नहीं मापी जा सकती। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संगठन से जुड़े लोगों का चरित्र, नैतिकता और सामाजिक व्यवहार कैसा है।
उन्होंने कहा, “आज विचारधारा का प्रभाव पहले की तुलना में काफी बढ़ा है, लेकिन समाज को ऐसे लोगों की जरूरत है जो ईमानदारी, सेवा और संस्कारों के मूल्यों पर खरे उतरें। यदि अच्छे इंसानों की संख्या कम होती जाएगी तो किसी भी विचारधारा का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।”
आत्ममंथन की जरूरत पर दिया जोर
विजयवर्गीय ने कहा कि वर्तमान समय केवल विस्तार का नहीं बल्कि आत्ममंथन का भी है। उनका मानना है कि संगठन को ऐसे कार्यकर्ताओं के निर्माण पर अधिक ध्यान देना चाहिए, जो समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें और अपने आचरण से संगठन की विचारधारा को मजबूत करें।

