4 जुलाई 2026
पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर छिड़ा अंदरूनी घमासान अब खुलकर सामने आने लगा है। हाईकमान द्वारा हाल ही में चुनावी कमेटियों के गठन और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बरकरार रखने के फैसले के बाद मचे बवाल पर खुद वड़िंग ने चुप्पी तोड़ी है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों द्वारा की जा रही लामबंदी और मतभेदों की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए राजा वड़िंग ने साफ किया कि उनके और चन्नी के बीच कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है।
वड़िंग ने पार्टी में एकजुटता का संदेश देते हुए यह भी ऐलान कर दिया कि वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं।
- “मेरा सपना सीएम बनना नहीं, कांग्रेस की सरकार लाना”
मीडिया से औपचारिक बातचीत के दौरान राजा वड़िंग ने बेहद सधे हुए अंदाज में गुटबाजी की खबरों पर पूर्णविराम लगाने की कोशिश की। उन्होंने कहा:
- चन्नी कैंप के ‘शक्ति प्रदर्शन’ के बाद आया बयान
गौरतलब है कि कांग्रेस हाईकमान द्वारा राजा वड़िंग को अध्यक्ष बनाए रखने और चरणजीत सिंह चन्नी को सिर्फ चुनाव प्रचार समिति (Campaign Committee) का चेयरमैन नियुक्त करने से चन्नी कैंप खासा नाराज है। बीते शुक्रवार को ही चन्नी के मोरिंडा स्थित आवास पर कई मौजूदा विधायकों और पूर्व मंत्रियों की एक गुप्त बैठक हुई थी, जिसे वड़िंग के खिलाफ एक बड़े ‘शक्ति प्रदर्शन’ के रूप में देखा जा रहा था। चन्नी समर्थकों की मांग है कि राज्य में कमान चन्नी को सौंपी जाए।
इसी सियासी तपिश को भांपते हुए राजा वड़िंग ने ‘डैमेज कंट्रोल’ करते हुए कहा कि चन्नी पार्टी के बेहद वरिष्ठ नेता हैं और वे सब मिलकर पंजाब के हक की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की।
- चुनावी रण से पहले कलह छिपाने की कवायद?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस साल 2022 की उन गलतियों को दोहराने से बचना चाहती है, जहां नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह की आपसी लड़ाई ने पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया था।
- हाईकमान की रणनीति: दिल्ली नेतृत्व ने वड़िंग को अध्यक्ष बनाए रखकर सांगठनिक स्थिरता दी है और चन्नी को अहम जिम्मेदारी देकर दलित समीकरणों को साधने की कोशिश की है।
- चुनौती: वड़िंग का यह बयान भले ही ऊपर से सब कुछ शांत दिखाने की कोशिश हो, लेकिन जमीनी स्तर पर चन्नी कैंप की महत्वाकांक्षाएं और मनीष तिवारी जैसे बड़े नेताओं की अनदेखी आगामी चुनावों में कांग्रेस के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है।

