नई दिल्ली:
देश की चुनावी प्रणाली और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एस.वाई. कुरैशी ने एक बेहद गंभीर और बड़ा बयान दिया है। एसआईआर (SIR) कवायद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। कुरैशी ने कहा कि जिस तरह से करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वह लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
‘प्रक्रिया की नीयत पर संदेह’
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने इस पूरी कवायद की मंशा पर सीधे तौर पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “पूरी एसआईआर (SIR) कवायद सही नीयत से नहीं की गई है। बड़े पैमाने पर, यानी करोड़ों की संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से डिलीट कर देना बेहद चिंताजनक है।” उन्होंने इसे देश के लोकतांत्रिक ढांचे को प्रभावित करने या उसके साथ ‘टिंकरिंग’ (छेड़छाड़) करने का प्रयास करार दिया।
लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा
एक पूर्व चुनाव प्रमुख के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
- वोटिंग अधिकार का हनन: कुरैशी का मानना है कि बिना पुख्ता और पारदर्शी प्रक्रिया के इतनी बड़ी संख्या में लोगों को वोटर लिस्ट से बाहर करना नागरिकों के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार का हनन है।
- पारदर्शिता की मांग: उन्होंने चुनाव प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की जरूरत पर बल दिया ताकि आम जनता का चुनावी सिस्टम पर भरोसा बना रहे।
गरमा सकती है देश की राजनीति
मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में देश का चुनाव प्रबंधन संभाल चुके एक अनुभवी विशेषज्ञ की यह टिप्पणी बेहद संवेदनशील समय पर आई है। विपक्ष इस बयान को हथियार बनाकर सरकार और संबंधित अथॉरिटीज को घेरने की तैयारी कर सकता है, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी घमासान और तेज होने के आसार हैं।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)

