केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद और विधानसभा की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार और विपक्ष के बीच स्वस्थ संवाद लोकतंत्र की असली ताकत है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों और नीतियों पर बहस का सबसे उपयुक्त मंच सदन ही है, जहां दोनों पक्ष अपनी बात खुलकर रख सकते हैं।
तमिलनाडु के कांचीपुरम दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में वित्त मंत्री ने कहा कि विपक्ष का दायित्व सरकार से सवाल पूछना है, जबकि सरकार की जिम्मेदारी उन सवालों का जवाब देना है। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत और जवाबदेह बनाती है।
राज्य और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए राज्य सरकारों को समय पर विस्तृत प्रस्ताव केंद्र के पास भेजने चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, मेडिकल कॉलेजों और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए केंद्र सरकार हर उचित प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने के लिए तैयार है।
आर्थिक प्रबंधन पर अपनी बात रखते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि किसी सरकार का कर्ज लेना अपने आप में चिंता का विषय नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि उधार लिए गए धन का उपयोग किस प्रकार किया जाता है। यदि इन संसाधनों को बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याण योजनाओं पर खर्च किया जाए, तो इसका लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि मजबूत वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के पारदर्शी उपयोग से सरकारें जरूरतमंद लोगों तक आर्थिक सहायता और विकास योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचा सकती हैं।
अपने संबोधन के अंत में निर्मला सीतारमण ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता सरकार और विपक्ष के बीच सार्थक संवाद, पारदर्शी शासन और जिम्मेदार वित्तीय प्रबंधन पर निर्भर करती है। उनके अनुसार, यही तत्व देश के समावेशी और सतत विकास की मजबूत नींव तैयार करते हैं।

