हैदराबाद: भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने अपने संसदीय नेतृत्व में अहम बदलाव करते हुए राज्यसभा सांसद वद्दीराजू रविचंद्र को पार्टी का नया संसदीय दल (Parliamentary Party) का नेता नियुक्त किया है। पार्टी अध्यक्ष और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने इस फैसले को मंजूरी देते हुए राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक रूप से इसकी जानकारी दे दी है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, वद्दीराजू रविचंद्र राज्यसभा में BRS के संसदीय दल का नेतृत्व करेंगे और संसद के उच्च सदन में पार्टी की रणनीति, समन्वय और विभिन्न मुद्दों पर पार्टी का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने की जिम्मेदारी निभाएंगे। उन्हें यह जिम्मेदारी ऐसे समय में सौंपी गई है, जब पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी संसदीय भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
रविचंद्र ने इस पद पर के. आर. सुरेश रेड्डी का स्थान लिया है, जिनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है। इससे पहले वह BRS संसदीय दल के उपनेता (Deputy Floor Leader) के रूप में कार्य कर रहे थे और संसद में पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
वद्दीराजू रविचंद्र वर्तमान में राज्यसभा में BRS का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उनका कार्यकाल वर्ष 2030 तक है। संसदीय कार्यों के दौरान वे विभिन्न स्थायी एवं परामर्शदात्री समितियों में भी सक्रिय रहे हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि उनका संसदीय अनुभव और संगठनात्मक समझ संसद में BRS की आवाज को और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नई जिम्मेदारी मिलने पर रविचंद्र ने BRS अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव (KTR) का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उन पर जो विश्वास जताया है, उस पर वह पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संसद में तेलंगाना से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा और जनता के हितों की आवाज प्रभावी ढंग से रखी जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BRS का यह फैसला पार्टी की संसदीय रणनीति को नई दिशा देने वाला कदम है। हाल के वर्षों में पार्टी राष्ट्रीय राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाने का प्रयास कर रही है और ऐसे में संसद के भीतर मजबूत नेतृत्व को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वद्दीराजू रविचंद्र की नियुक्ति को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे संसद में पार्टी की भूमिका और प्रभाव को मजबूत किया जा सके।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)

