भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब परिवार के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। पुलिस अधिकारियों ने मौखिक रूप से परिवार को भरोसा दिलाया कि पिता, भाई और अन्य परिजनों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस ले ली गई है, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई लिखित आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया है।
भरत तिवारी के ममेरे भाई लव कुमार का कहना है कि प्रशासन की ओर से कई बार यही बात दोहराई गई कि परिवार का नाम केस से हटा दिया गया है, लेकिन जब लिखित दस्तावेज मांगा गया तो कोई आधिकारिक प्रति नहीं दी गई। उनका कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होती और जब तक लिखित आदेश नहीं मिलता, तब तक एफआईआर हटने की पुष्टि नहीं मानी जा सकती।
लव कुमार के अनुसार, गुरुवार रात जगदीशपुर के एसडीपीओ पंकज मिश्रा से उनकी फोन पर बातचीत हुई थी। एसडीपीओ ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है और मामले की पूरी जानकारी जुटाने के बाद दस मिनट में दोबारा संपर्क करेंगे। परिवार पूरी रात उनके फोन का इंतजार करता रहा, लेकिन कोई कॉल वापस नहीं आया। शुक्रवार सुबह भी कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, मगर फोन का जवाब नहीं मिला।
परिजनों का कहना है कि यदि वास्तव में एफआईआर वापस ली जा चुकी है तो प्रशासन को इसका लिखित आदेश जारी करने में देरी नहीं करनी चाहिए। दस्तावेज न मिलने से परिवार असमंजस और चिंता की स्थिति में है।
उधर, भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है। परिवार न्याय की मांग पर कायम है, जबकि कई सामाजिक संगठनों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों ने भी पूरे मामले की पारदर्शी जांच और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई है। हाल के विरोध-प्रदर्शनों और महापंचायतों के बाद प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
फिलहाल, परिवार प्रशासन की ओर से लिखित आदेश जारी होने का इंतजार कर रहा है। वहीं, इस पूरे मामले पर अभी तक कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

