Friday, September 4, 2026
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सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किये के रक्षा समझौते पर तुर्किये की सफाई, बोले- ईरान के खिलाफ नहीं है करार

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अंकारा: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच हुए संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर तुर्किये ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता किसी खास देश के खिलाफ नहीं है। तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि इस समझौते का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करना है, न कि किसी देश को निशाना बनाना।

ईरान के खिलाफ होने की अटकलों को किया खारिज

हाकान फिदान ने समझौते को लेकर उठ रही उन अटकलों को खारिज किया, जिनमें इसे खास तौर पर ईरान के खिलाफ कदम बताया जा रहा था। उन्होंने कहा कि समझौते में किसी देश को साझा दुश्मन के तौर पर परिभाषित नहीं किया गया है।

फिदान के मुताबिक, तीनों देशों के बीच सहयोग का मकसद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और संभावित खतरों से मिलकर निपटने की क्षमता बढ़ाना है।

क्या है तीनों देशों के बीच रक्षा समझौता?

मक्का में हुए इस रक्षा समझौते के तहत अगर सऊदी अरब, पाकिस्तान या तुर्किये में से किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके बाद संबंधित देश सामूहिक रूप से सुरक्षा प्रतिक्रिया देने की स्थिति में होंगे।

हाकान फिदान ने इस प्रावधान की तुलना नाटो के सामूहिक रक्षा सिद्धांत से की। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता किसी साझा दुश्मन के खिलाफ गठबंधन नहीं है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ा फोकस

मध्य पूर्व और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच यह रक्षा सहयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तीनों देशों के बीच सैन्य और रणनीतिक सहयोग बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

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