Friday, September 4, 2026
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E20 इथेनॉल नीति से मेरा कोई लेना-देना नहीं: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, AI डीपफेक वीडियो और झूठे दावों पर भड़के; कोर्ट से मिली मुकदमा करने की मंजूरी

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मुंबई:

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E20 इथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति से अपना किसी भी प्रकार का सीधा संबंध होने से साफ इनकार किया है। बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर एक प्रस्तावित दीवानी याचिका में गडकरी ने खुलासा किया है कि सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो और भ्रामक पोस्ट के जरिए उनकी छवि को सुनियोजित तरीके से धूमिल किया जा रहा है।

  • आर्थिक लाभ के दावे पूरी तरह झूठे: सोशल मीडिया पर कुछ डिजिटल कंटेंट के जरिए यह भ्रामक दावा किया जा रहा था कि E20 नीति से नितिन गडकरी और उनके परिवार को सीधा आर्थिक फायदा हुआ है, जिसे मंत्री ने सिरे से खारिज किया है।
  • AI डीपफेक का इस्तेमाल: गडकरी का आरोप है कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए एआई तकनीक का गलत इस्तेमाल करके फर्जी वीडियो और बयान गढ़े जा रहे हैं।
  • बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत: हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री को मेटा (Meta), गूगल (Google), एक्स (X) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी है।
  • कंटेंट हटाने की मांग: याचिका में मांग की गई है कि इंटरनेट पर मौजूद सभी एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो और मानहानिकारक सामग्री को तुरंत हटाया जाए।

देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की महत्वाकांक्षी योजना (E20 Policy) को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस नीति से अपने या अपने परिवार के किसी भी प्रत्यक्ष व्यावसायिक लाभ को लेकर फैल रही अफवाहों पर कड़ी आपत्ति जताई है।

गडकरी की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, कुछ शरारती तत्वों और डिजिटल पेजों द्वारा यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि इस सरकारी नीति के पीछे उनका व्यक्तिगत हित जुड़ा हुआ है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह से देश के हरित ऊर्जा (Green Energy) विजन और कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए लाई गई एक राष्ट्रीय नीति है, जिसका उनके निजी व्यापार या लाभ से कोई सीधा संबंध नहीं है।

टेक कंपनियों पर कसेगा शिकंजा

अदालत में उठाए गए इस कदम के बाद अब गूगल, मेटा और एक्स जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय होने की उम्मीद है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि टेक्नोलॉजी कंपनियों को ऐसे एल्गोरिदम और टूल्स विकसित करने चाहिए, जो डीपफेक और फर्जी विज्ञापनों को तुरंत पहचान कर स्वतः ब्लॉक कर सकें।

मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)

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