विशेष रिपोर्ट: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं का मामला अब वित्तीय गबन से आगे बढ़कर एक गहरे राजनीतिक रहस्य में बदलता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के तीखे हमलों के बीच, भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हालिया बयान ने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
अपने गृह जनपद गोंडा पहुंचे बृजभूषण सिंह ने मीडिया के कैमरों के सामने जो कहा, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाइयों का सहारा लेते हुए खुद को “32 दांतों के बीच फंसी जीभ” जैसा लाचार बताया और कहा कि वह बहुत कमजोर आदमी हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर उन्होंने आज सच कह दिया, तो वह खुद मुसीबत में पड़ जाएंगे क्योंकि इस मामले के पीछे बेहद ताकतवर लोग हैं।
क्या यह केवल एक बयान है या कोई सियासी संकेत? राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जो नेता कभी किसी दबाव के आगे नहीं झुका, उसका खुद को ‘कमजोर’ बताना और ‘ताकतवर लोगों’ का खौफ दिखाना सामान्य नहीं है। यह बयान सीधे तौर पर इशारा करता है कि राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व प्रभारी महिपाल सिंह द्वारा लगाए गए सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने और पैसों की हेराफेरी के आरोपों में कहीं न कहीं ऐसी परतें हैं, जिन्हें खोलने से सत्ता के गलियारों में बैठे बड़े चेहरों को नुकसान पहुंच सकता है। फिलहाल ट्रस्ट ने मामले की जांच एक रिटायर्ड सैन्य अधिकारी को सौंपी है, लेकिन बृजभूषण के इस कबूलनामे ने जांच की विश्वसनीयता और इस विवाद की गंभीरता को कई गुना बढ़ा दिया है।