मिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर नए सिरे से ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक शुरू कर दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े तेवरों के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों ने ईरान के रडार सिस्टम, एयर डिफेंस और कमांड सेंटर्स को निशाना बनाया है। इस ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में युद्ध की चिंगारी और भड़क गई है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भी भारी उछाल देखा जा रहा है।
क्यों भड़का ट्रंप का गुस्सा?
यह ताजा तनाव तब शुरू हुआ जब ओमान के तट और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) के पास अमेरिकी सेना का एक ‘अपाचे’ (Apache) हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधा आरोप लगाया कि ईरान के ड्रोन से टकराने के कारण यह हादसा हुआ।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान नए परमाणु समझौते की शर्तों पर तुरंत सहमत नहीं हुआ, तो उस पर सैन्य हमले और तेज किए जाएंगे। उन्होंने दोटूक कहा, “या तो बातचीत से मसला हल होगा, या फिर हम उन पर अब तक का सबसे भीषण हमला करेंगे।”
🇨🇳 बीजिंग की एंट्री: चीन ने अमेरिका को दी ये ‘नसीहत’
इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की महाशक्ति चीन भी एक्टिव हो गया है। बीजिंग ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका की इस सैन्य आक्रामकता पर गहरी चिंता जताई है। चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर अमेरिका को नसीहत दी है कि:
- संयम बरतें: अमेरिका तुरंत सैन्य बल का प्रयोग बंद करे और इलाके में तनाव को हवा देना बंद करे।
- बातचीत का रास्ता चुनें: किसी भी समस्या का समाधान केवल राजनयिक बातचीत और परमाणु समझौते (Nuclear Deal) के शांतिपूर्ण नियमों से ही संभव है, धमकियों से नहीं।
- संप्रभुता का सम्मान: चीन ने कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन क्षेत्र को और अधिक अस्थिर करेगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती है।
युद्ध का मैदान बना ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान ने घोषणा की है कि उसने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके साथ ही ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों की तरफ मिसाइलें और ड्रोन दागकर पलटवार किया है, जिससे पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
🇮🇳 भारत की भी बढ़ी चिंता
इस जंग की आंच से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ताजा ब्लॉकचेन और सैन्य कार्रवाई के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक कमर्शियल जहाज (MT Settebello) पर हुए हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत की भी पुष्टि हुई है, जिससे भारत सरकार भी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।
बड़ी बात: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच मध्यस्थता करा रहे देश (जैसे पाकिस्तान और अन्य देश) अगले 48 घंटों में कोई सीजफायर या समझौता नहीं करा पाते, तो यह संकट तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति में बदल सकता है।