मुजफ्फरपुर 4 जुलाई 2026
मुजफ्फरपुर में ‘भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर’ मामले को लेकर चौतरफा घिरे SDPO राजेश शर्मा की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस ताज़ा विवाद के बीच, अब करीब 19 साल पुराना एक और कथित फर्जी एनकाउंटर का जिन्न बाहर आ गया है। साल 2007 में हुए इस बहुचर्चित एनकाउंटर मामले में आगामी 15 जुलाई को मुजफ्फरपुर कोर्ट में एक बेहद अहम सुनवाई होने जा रही है, जिस पर सबकी नजरें टिक गई हैं।
क्या है 2007 का वह खौफनाक मामला?
यह मामला वर्ष 2007 का है, जब मुजफ्फरपुर में पुलिस मुठभेड़ के दौरान तीन युवकों की मौत हो गई थी। उस वक्त इस पुलिसिया कार्रवाई पर कई गंभीर सवाल उठे थे।
- परिजनों का आरोप: मृतकों के परिवारों ने इसे ‘टारगेटेड मर्डर’ और फर्जी एनकाउंटर करार दिया था।
- सीआईडी जांच पर उठे सवाल: मामले की सीआईडी (CID) जांच और उसकी चार्जशीट को परिजनों ने सिरे से खारिज कर दिया था। इसके बाद खुद मानवाधिकार आयोग ने भी सीआईडी की जांच प्रक्रिया पर उंगली उठाई थी।
2013 में दर्ज हुआ था केस, गवाहों के अभाव में अटका रहा
पुलिसिया क्लोजर रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर पीड़ितों ने कानूनी लड़ाई जारी रखी। साल 2013 में मुजफ्फरपुर कोर्ट में तत्कालीन सदर थाना प्रभारी (वर्तमान SDPO) राजेश शर्मा सहित चार थाना प्रभारियों और कई अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया। हालांकि, पर्याप्त गवाह न मिल पाने और कानूनी पेचीदगियों के कारण यह मामला पिछले लंबे समय से ठंडे बस्ते में धूल फांक रहा था।
भरत भूषण तिवारी केस बनते ही न्याय की उम्मीद फिर जागी
हाल ही में हुए भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले ने जैसे ही तूल पकड़ा और SDPO राजेश शर्मा का नाम सामने आया, पुराने पीड़ितों का जख्म एक बार फिर हरा हो गया।
- मां की कानूनी लड़ाई: मामले के मृतक मनीष महिवाल की मां अनीता देवी ने हिम्मत दिखाते हुए न्यायालय में एक नया आवेदन दाखिल किया है, जिसमें उन्होंने मामले की दोबारा (Re-hearing) सुनवाई की मांग की है।
- मानवाधिकार वकील की एंट्री: मानवाधिकार आयोग से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता एस.के. झा ने अदालत के समक्ष पीड़ितों का पक्ष रखते हुए केस को पुनर्जीवित करने का पुरजोर आग्रह किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस आवेदन को स्वीकार कर लिया है और 15 जुलाई की तारीख मुकर्रर की है।
15 जुलाई की सुनवाई क्यों है बेहद अहम?
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, 15 जुलाई को होने वाली यह सुनवाई SDPO राजेश शर्मा और तत्कालीन पुलिस टीम के भविष्य के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। कोर्ट इस दिन तय करेगा कि क्या इस 19 साल पुराने केस की नए सिरे से जांच होगी या गवाहों को दोबारा समन किया जाएगा। भरत भूषण तिवारी मामले की आंच झेल रही पुलिस के लिए यह पुरानी फाइल खुलना किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

