वॉशिंगटन/तेहरान:
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब तक के सबसे खतरनाक और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ईरान को तेल निर्यात के लिए दी गई सभी प्रकार की ‘प्रतिबंधी छूटों’ को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। व्हाइट हाउस और अमेरिकी वित्त मंत्रालय के इस साझा कड़े कदम के बाद ईरान के लिए दुनिया के किसी भी देश को तेल बेचना अब पूरी तरह नामुमकिन हो गया है।
इस आर्थिक नाकेबंदी के साथ ही अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य मोर्चा खोलते हुए उसके तटीय ठिकानों पर भारी हवाई हमले शुरू कर दिए हैं।
कार्रवाई की बड़ी वजह: ‘होर्मुज स्ट्रेट’ में जहाजों पर हमला
अमेरिकी प्रशासन और सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह सख्त जवाबी कार्रवाई सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट में तीन कमर्शियल जहाजों पर हुए संदिग्ध ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद की गई है।
- भारत आ रहा जहाज भी निशाना: इन हमलों में कतर से भारत के गुजरात (दाहेज) आ रहा कतरी एलएनजी टैंकर जहाज ‘अल-रेकैयात’ भी शामिल था। हमले के बाद इस जहाज के इंजन रूम में आग लग गई थी, हालांकि इस पर सवार 4 भारतीय क्रू मेंबर्स समेत सभी सदस्य सुरक्षित हैं।
- कतर और अमेरिका ने इन हमलों के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा हमला बताया है।
अमेरिका का दोहरा प्रहार: आर्थिक नाकेबंदी और सैन्य बमबारी
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को घुटनों पर लाने के लिए एक साथ दो रणनीतिक कदम उठाए हैं:
- ‘अच्छे व्यवहार’ की छूट खत्म: ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया कि हाल ही में हुए समझौते के तहत ईरान को दी गई तेल प्रतिबंधों में राहत पूरी तरह उसके ‘अच्छे व्यवहार’ की शर्त पर टिकी थी। तेहरान द्वारा इस संघर्ष-विराम और शर्तों के खुले उल्लंघन के बाद अब सभी रियायतें हमेशा के लिए खत्म कर दी गई हैं। जो भी देश अब ईरानी तेल खरीदेगा, उसे सख्त अमेरिकी प्रतिबंधों को झेलना होगा।
- तटीय ठिकानों पर विनाशकारी हवाई हमले: आर्थिक प्रतिबंधों के लागू होते ही अमेरिकी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने ईरान के तटीय सैन्य ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय रडार साइटों और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के ठिकानों पर भीषण बमबारी की। ईरान के तटीय शहरों बंदर अब्बास, सिरीक और केश्म द्वीप पर भारी धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं।
भारत सहित दुनिया पर क्या होगा असर?
इस अप्रत्याशित सैन्य और आर्थिक टकराव का वैश्विक स्तर पर गहरा असर पड़ने की आशंका है:
- वैश्विक तेल बाजार में भूचाल: ईरान दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल उत्पादकों में से एक है। उसके तेल पर पूरी तरह रोक लगने और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा मंडरा रहा है।
- भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में कच्चे तेल और गैस का आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतें भारत में महंगाई और अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव बना सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच अचानक भड़के इस युद्ध जैसे हालात के बाद पूरी दुनिया सहमी हुई है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिबंधों और हवाई हमलों की तीखी आलोचना करते हुए इसे समझौते का उल्लंघन बताया है और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। आने वाले दिनों में यह टकराव क्या मोड़ लेता है, इस पर वैश्विक सुरक्षा और शेयर बाजारों की निगाहें टिकी हैं।

