बिलासपुर, 26 अगस्त 2026। भिलाई नगर निगम के वार्ड क्रमांक 35 शारदापारा से निर्वाचित पार्षद मोहम्मद सलमान की बर्खास्तगी के मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दुर्ग संभागायुक्त द्वारा की गई बर्खास्तगी की कार्रवाई को सही ठहराते हुए इसे बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने माना कि संभागायुक्त ने अपने अधिकार क्षेत्र के तहत कार्रवाई की थी।
फर्जी जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा था मामला
पूरा विवाद पार्षद मोहम्मद सलमान के जाति प्रमाण पत्र को लेकर था। वार्ड क्रमांक 35 शारदापारा की सीट वर्ष 2021 के नगर निगम चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित थी। सलमान ने इस सीट से चुनाव लड़ते हुए खुद को कुंजड़ा समुदाय का बताया था और चुनाव जीतकर पार्षद निर्वाचित हुए थे।
बाद में उनकी जाति को लेकर शिकायत सामने आई। शिकायत की जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। जांच में उनके जाति संबंधी दावे के समर्थन में वैध जाति प्रमाण पत्र का रिकॉर्ड नहीं मिलने की बात सामने आई।
6 मई 2024 को हुई थी बर्खास्तगी
जांच के बाद दुर्ग संभागायुक्त ने 6 मई 2024 को मोहम्मद सलमान को पार्षद पद से बर्खास्त कर दिया था। संभागायुक्त की इस कार्रवाई को सलमान ने चुनौती दी और मामले को हाईकोर्ट में लेकर पहुंचे।
सुनवाई के दौरान बर्खास्तगी की प्रक्रिया के साथ-साथ संभागायुक्त के अधिकार क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठाए गए। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले पर विचार करने के बाद संभागायुक्त की कार्रवाई को उचित माना और बर्खास्तगी को बरकरार रखा।
आरक्षित सीटों पर जाति प्रमाण पत्र की वैधता अहम
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद भिलाई नगर निगम के वार्ड क्रमांक 35 से जुड़ा लंबे समय से चला आ रहा विवाद फिलहाल खत्म हो गया है। यह फैसला स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षित सीटों पर उम्मीदवारों के जाति प्रमाण पत्र की वैधता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फैसले से यह संदेश भी स्पष्ट होता है कि आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित चुनावी सीट पर उम्मीदवार की पात्रता और जाति संबंधी दस्तावेजों की वैधता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में दस्तावेजों की जांच के बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई न्यायिक समीक्षा के दायरे में भी परखी जा सकती है।

