Thursday, September 24, 2026
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माजीसा माँ के 338वें जन्मोत्सव पर करणी सेना ने किया नमन, वीरेंद्र सिंह तोमर ने भक्तों की खुशहाली की कामना

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रायपुर। राजस्थान की प्रसिद्ध लोक आराध्य देवी माजीसा माँ के 338वें जन्मोत्सव के अवसर पर देशभर में श्रद्धा और आस्था का माहौल है। इस विशेष अवसर पर क्षत्रिय करणी सेना की ओर से माजीसा माँ के भक्तों को शुभकामनाएं दी गईं। करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष तथा किसान नेता वीरेंद्र सिंह तोमर ने माजीसा माँ को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए प्रदेशवासियों सहित देश-विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

वीरेंद्र सिंह तोमर ने माजीसा माँ के अवतरण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि माजीसा माँ के प्रति लाखों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति और प्रदेशवासियों के मंगल की कामना की। साथ ही माजीसा माँ के धाम के दर्शन के लिए रवाना हुए श्रद्धालुओं के दल की सुरक्षित और मंगलमय यात्रा की भी शुभकामना दी।

तोमर ने कहा कि माजीसा माँ का धाम श्रद्धालुओं के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने स्वयं भी माजीसा माँ के धाम में दर्शन करने की इच्छा व्यक्त की और प्रार्थना की कि मां का आशीर्वाद सभी भक्तों पर बना रहे।

माजीसा माँ को कई नामों से पूजते हैं श्रद्धालु

राजस्थान की धार्मिक और लोक परंपराओं में माजीसा माँ को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। उन्हें रानी भटियानी सा, स्वरूप कँवर बाईसा, भुआसा, भुआजी, मोतियाँवाली माँ और जसोल की धनियानी के नाम से भी श्रद्धा के साथ पूजा जाता है।

लोक मान्यता के अनुसार माजीसा माँ का मूल नाम स्वरूप कँवर था। उनका अवतरण जैसलमेर जिले के जोगीदास गांव में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी को विक्रम संवत 1745 में हुआ माना जाता है। इसी आधार पर उनका जन्मोत्सव भाद्रपद शुक्ल सप्तमी के दिन मनाया जाता है। 2 सितंबर 1688 को उनका अवतरण दिवस माना जाता है।

जैसलमेर से लगभग 85 किलोमीटर दूर स्थित जोगीदास गांव को वर्तमान में जोगीदास धाम के नाम से जाना जाता है। माजीसा माँ के मायके के रूप में प्रसिद्ध इस स्थान पर श्रद्धालुओं की आस्था लंबे समय से जुड़ी हुई है।

भाटी राजवंश से जुड़ा है जोगीदास का इतिहास

माजीसा माँ की कथा जोगीदास गांव और भाटी राजवंश के इतिहास से भी जुड़ी हुई है। लोक परंपरा के अनुसार राजश्री खेतसिंह के वंश में पंचावण दास और उनके बाद पृथ्वीराज हुए। पृथ्वीराज के पांच पुत्रों में जोगीदास सबसे बड़े थे।

बताया जाता है कि पृथ्वीराज को भाटीसरा क्षेत्र की जागीर मिली थी। इसके बाद जोगीदास ने विक्रम संवत 1741 में अपने नाम पर जोगीदास गांव बसाया। उन्हें इस क्षेत्र का पहला जागीरदार माना जाता है। क्षेत्र के विकास के लिए उनके द्वारा गोगासर कुआं और राणासर तालाब बनवाए जाने की बात भी स्थानीय परंपराओं में मिलती है।

जोगीदास के विवाह के बाद लंबे समय तक संतान नहीं हुई। लोक मान्यता के अनुसार उन्होंने भाटी वंश की कुलदेवी माँ स्वांगिया जी की आराधना की। इसके बाद विक्रम संवत 1745 में स्वरूप कँवर का जन्म हुआ। जन्म के नौवें दिन उनका नामकरण स्वरूप कँवर के रूप में किया गया।

जसोल पहुंचीं स्वरूप कँवर, बनीं रानी भटियानी

स्वरूप कँवर का विवाह आगे चलकर मालानी राज्य के जसोल के रावल कल्याण सिंह के साथ हुआ। विवाह के बाद उन्हें रानी सा के रूप में सम्मान मिला और भाटी कुल में जन्म होने के कारण वे रानी भटियानी सा के नाम से प्रसिद्ध हुईं।

लोककथाओं के अनुसार स्वरूप कँवर से कल्याण सिंह को पुत्र लालसिंह की प्राप्ति हुई। बाद में बड़ी रानी देवड़ी अणंदकँवर के पुत्र प्रतापसिंह का जन्म हुआ। दोनों राजकुमारों और राजपरिवार से जुड़े घटनाक्रमों की कई कथाएं आज भी माजीसा माँ की लोकगाथा का हिस्सा हैं।

माजीसा माँ की प्रचलित कथा में बताया जाता है कि पारिवारिक परिस्थितियों और उत्तराधिकार से जुड़े विवादों के बीच लालसिंह की असमय मृत्यु हो गई। पुत्र की मृत्यु से स्वरूप कँवर को गहरा आघात लगा और उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया।

लोक मान्यता के अनुसार 22 जनवरी 1719 को माघ शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन उन्होंने अपने पुत्र लालसिंह को गोद में लेकर देह त्याग दी। इसके बाद स्वरूप कँवर को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा किए जाने की परंपरा और मजबूत हुई।

मंगणियार रामा की लोककथा भी है प्रसिद्ध

माजीसा माँ से जुड़ी लोककथाओं में मंगणियार रामा का प्रसंग विशेष रूप से बताया जाता है। मान्यता के अनुसार रामा जसोल पहुंचे थे और स्वरूप कँवर से मिलने की इच्छा रखते थे। उनके देह त्यागने की जानकारी मिलने के बाद वे कागा श्मशान घाट पहुंचे और वहां उनकी आराधना की।

लोककथा के अनुसार इसी दौरान उन्हें माजीसा माँ के दर्शन हुए। कहा जाता है कि उन्होंने रामा को कुछ वस्तुएं और मिश्री देकर अपने मायके में संदेश पहुंचाने को कहा। रामा जब जोगीदास पहुंचे तो उन्होंने परिवार को पूरी घटना बताई।

इसी कथा से जुड़े एक अन्य प्रसंग में भगवान दास नामक सुनार की आंखों की रोशनी लौटने की बात कही जाती है। ये घटनाएं धार्मिक आस्था और स्थानीय लोक परंपराओं का हिस्सा हैं।

लूणी नदी किनारे बना माजीसा माँ का मंदिर

माजीसा माँ की पूजा से जुड़ी एक अन्य लोक मान्यता जसोल स्थित मंदिर से संबंधित है। कथा के अनुसार रानी देवड़ी अणंदकँवर की तबीयत खराब होने के बाद रावल कल्याण सिंह ने स्वरूप कँवर की कृपा की कामना की थी। रानी के स्वस्थ होने के बाद उन्होंने स्वरूप कँवर की स्मृति में मंदिर निर्माण का संकल्प लिया।

लूणी नदी के किनारे स्थित स्थान को माजीसा माँ की पूजा के प्रमुख केंद्रों में माना जाता है। समय के साथ यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई और माजीसा माँ की आराधना की परंपरा दूर-दूर तक फैलती गई।

जोगीदास धाम में हुआ मंदिर का विस्तार

जोगीदास गांव में भी माजीसा माँ की पूजा लंबे समय से होती रही है। स्थानीय मान्यता के अनुसार शुरुआत में यहां छोटे से थान पर श्रद्धालु पूजा करते थे। बाद में भाटी परिवार, वडेरा परिवार और दक्षिणी बसिया क्षेत्र के लोगों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया।

23 अक्टूबर 1999 को विक्रम संवत 2056 के आसोज सुदी तेरस के दिन मंदिर में माँ स्वरूप कँवर और उनके पुत्र लालसिंह की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई। इसके बाद 13 अक्टूबर 2008 को विक्रम संवत 2065 के आसोज सुदी चौदस के दिन साँवाईसिंह की मूर्ति की भी प्राण प्रतिष्ठा की गई।

माजीसा माँ से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं में क्षेत्र के जलस्रोतों का भी उल्लेख मिलता है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच ऐसी मान्यताएं प्रचलित हैं कि कुछ स्थानों पर पानी की गुणवत्ता और जलस्तर में बदलाव को मां की कृपा से जोड़कर देखा जाता है।

जन्मोत्सव पर भक्तों ने मांगी सुख-शांति की कामना

माजीसा माँ का 338वां जन्मोत्सव श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था का विशेष अवसर है। राजस्थान के साथ देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों में रहने वाले भक्त भी इस अवसर पर माजीसा माँ को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं।

इसी क्रम में क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ने माजीसा माँ को नमन करते हुए सभी श्रद्धालुओं को जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मां से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना की तथा माजीसा माँ के धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा मंगलमय होने की कामना की।

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