नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। ट्रंप ने कहा है कि दोनों देश ट्रेड डील के काफी करीब पहुंच चुके हैं और यह समझौता पहले किए गए व्यापार समझौतों से काफी अलग होगा। इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
ट्रंप बोले- ट्रेड डील के काफी करीब हैं दोनों देश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। उन्होंने संकेत दिया कि प्रस्तावित करार का स्वरूप पहले हुए समझौतों से अलग हो सकता है। हालांकि, ट्रंप ने समझौते की शर्तों या इसे अंतिम रूप दिए जाने की तारीख के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर पिछले कई महीनों से बातचीत चल रही है। दोनों पक्ष बाजार तक पहुंच, टैरिफ और व्यापार से जुड़े अन्य मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
मार्को रुबियो की भारत यात्रा में व्यापार पर चर्चा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। बातचीत में व्यापार समझौते के साथ ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, तकनीक और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दे शामिल रहे।
रुबियो ने भी संकेत दिया कि व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अब कुछ ही मुद्दों पर काम बाकी है। उन्होंने अमेरिकी ऊर्जा और तकनीकी उत्पादों के साथ व्यापार बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
ऊर्जा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर
बैठक के दौरान दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने पर चर्चा की। अमेरिका की ओर से भारत के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ाने तथा अमेरिकी तकनीक और प्रणालियों की खरीद बढ़ाने की बात भी रखी गई।
रक्षा और नागरिक परमाणु सहयोग में हुई प्रगति को भी महत्वपूर्ण बताया गया। दोनों देश व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ रणनीतिक सहयोग को भी आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
समझौते पर अब सबकी नजर
डोनाल्ड ट्रंप और मार्को रुबियो के हालिया बयानों से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। हालांकि, अभी समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर और उसकी अंतिम शर्तों की घोषणा होना बाकी है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश लंबित मुद्दों पर कब तक सहमति बनाते हैं और प्रस्तावित करार को अंतिम रूप देते हैं।

