Monday, October 19, 2026
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हल्दीघाटी युद्ध पर मोहन भागवत का बड़ा बयान: “अगर मुगल सेना पीछे हटी, तो जीत किसकी हुई?”

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उदयपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध को लेकर एक बड़ा और विचारोत्तेजक बयान दिया है। उन्होंने महाराणा प्रताप की वीरता को रेखांकित करते हुए हल्दीघाटी के युद्ध को राजपूत राजा की “स्पष्ट और अकाट्य विजय” करार दिया।

भागवत ने कहा कि सदियों से भारत के ऐतिहासिक आख्यानों (Historical Narrative) को इस तरह से तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, जिससे स्वदेशी राजाओं और नायकों के बजाय विदेशी आक्रमणकारियों का महिमामंडन होता रहा है।

बयान की मुख्य बातें:

  • इतिहास की समीक्षा: आरएसएस प्रमुख ने सवाल उठाया कि यदि हल्दीघाटी के मैदान से मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा था, तो फिर जीत किसकी मानी जानी चाहिए? उन्होंने साफ तौर पर इसे महाराणा प्रताप की जीत बताया।
  • विदेशी आक्रमणकारियों का महिमामंडन: उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि देश के इतिहास को इस तरह लिखा गया जिससे हमारे अपने नायकों का महत्व कम हो और आक्रमणकारियों को बड़ा दिखाया जाए। अब इस नैरेटिव को बदलने का समय आ गया है।
  • स्वदेशी गौरव: मोहन भागवत ने जोर देकर कहा कि इतिहास की किताबों में भारतीय संस्कृति, अस्मिता और देश की रक्षा के लिए लड़ने वाले सच्चे नायकों को उनका सही स्थान मिलना चाहिए।

क्यों अहम है यह बयान?

हल्दीघाटी का युद्ध (1576) भारतीय इतिहास के सबसे चर्चित अध्यायों में से एक है, जो मेवाड़ के महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर की सेना (मानसिंह के नेतृत्व में) के बीच लड़ा गया था। पारंपरिक इतिहास में इस युद्ध के परिणामों को लेकर अलग-अलग मत रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में महाराणा प्रताप को इस युद्ध का विजेता साबित करने वाले तर्कों और शोध को काफी बल मिला है। मोहन भागवत का यह बयान इसी वैचारिक बदलाव को और मुखर करता है।

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