रायपुर: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्षत्रिय करणी सेना के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष भाई वीरेंद्र सिंह तोमर ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे देशभर में आंदोलनरत युवाओं की “आधी लेकिन महत्वपूर्ण जीत” बताया है। उन्होंने कहा कि छात्रों का संघर्ष तब पूरी तरह सफल माना जाएगा, जब देश की शिक्षा व्यवस्था में जड़ से लेकर शीर्ष स्तर तक व्यापक और स्थायी सुधार दिखाई देंगे।
तोमर ने कहा कि लगातार सामने आए पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। उनके अनुसार, सरकार समय रहते इन गंभीर समस्याओं पर प्रभावी कदम उठाने में विफल रही, जिसके कारण छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ा।
उन्होंने कहा कि पिछले कई सप्ताह से दिल्ली का जंतर-मंतर छात्रों के आंदोलन का केंद्र बना हुआ था, जहां देशभर से आए युवा निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा सुधार की मांग कर रहे थे। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारी छात्र जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर केवल भारतीय नागरिक के रूप में अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे।
वीरेंद्र सिंह तोमर ने आरोप लगाया कि आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस का सहारा लिया गया, लेकिन इसके बावजूद छात्रों ने शांतिपूर्ण और संयमित रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि युवाओं का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कराना है।
प्रसिद्ध दुष्यंत कुमार की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए तोमर ने कहा कि देश के युवाओं ने बदलाव की नई शुरुआत की है। उनके अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का संकेत है कि लोकतांत्रिक आंदोलनों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए आंदोलन आगे भी जारी रहना चाहिए। उनके मुताबिक, छात्रों का यह संघर्ष केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग का प्रतीक है।

