नई दिल्ली:
भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को एक नए युग में ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एलान किया है कि भारत सरकार एक बेहद हाई-टेक और अभेद्य “स्मार्ट बॉर्डर” सुरक्षा व्यवस्था विकसित कर रही है। अमित शाह के मुताबिक, आने वाले कुछ ही वर्षों में भारत की यह सीमा सुरक्षा प्रणाली पूरी दुनिया में सबसे आधुनिक और तकनीक-संचालित व्यवस्था बन जाएगी।
नई दिल्ली में आयोजित ‘सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने देश की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित और घुसपैठ-मुक्त बनाने का एक व्यापक रोडमैप पेश किया।
क्या है ‘स्मार्ट बॉर्डर’ और ‘फोर-लेयर सिक्योरिटी ग्रिड’?
गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि सरकार अब केवल पारंपरिक सीमा चौकियों पर निर्भर रहने के बजाय “चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड” तैयार कर रही है।
- इस ग्रिड के तहत सीमा सुरक्षा बल (BSF), राज्य सरकारें, जिला प्रशासन, केंद्रीय एजेंसियां और सीमावर्ती इलाकों के स्थानीय लोग मिलकर एक साथ काम करेंगे।
- इसके जरिए सीमा सुरक्षा के दृष्टिकोण को ‘रिएक्टिव’ (घटना होने पर कार्रवाई करना) से बदलकर ‘प्रोएक्टिव’ (घटना होने से पहले रोकना) किया जा रहा है।
तकनीक के दम पर रुकेगी घुसपैठ और नार्को नेटवर्क
स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट के तहत पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती भारत की संवेदनशील सीमाओं पर भौतिक फेंसिंग (बाड़) के साथ-साथ अत्याधुनिक तकनीकों का जाल बिछाया जा रहा है। इस व्यवस्था में मुख्य रूप से शामिल होंगे:
- ड्रोन और राडार: चौबीसों घंटे हवाई निगरानी और मूवमेंट पर नजर रखने के लिए।
- स्मार्ट और हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे: घने कोहरे, अंधेरे या खराब मौसम में भी सटीक निगरानी के लिए।
- रीयल-टाइम मॉनिटरिंग: किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम और कमांडरों तक पहुंचाने के लिए।
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि इस आधुनिक तकनीक का उपयोग अवैध घुसपैठ, ड्रोन के जरिए हथियारों की सप्लाई, साइबर अपराध, मवेशी तस्करी और नकली करेंसी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने भरोसा जताया कि अगले तीन वर्षों के भीतर देश से नार्कोटिक्स (ड्रग्स) के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएग
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सीमा बुनियादी ढांचे में 400% की भारी बढ़ोतरी
गृह मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों के दौरान बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर (सीमा पर सड़कों, पुलों और चौकियों के निर्माण) के बजट और निवेश में 400 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। इसके अलावा, भारत-म्यांमार सीमा पर लगभग 1,610 किलोमीटर लंबी फेंसिंग का काम भी ₹31,000 करोड़ की लागत से तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
‘वाइब्रेंट विलेज’ और डेमोग्राफी मिशन पर जोर
सुरक्षित सीमा के लिए वहां रहने वाले समाज का जागरूक होना जरूरी बताते हुए अमित शाह ने कहा कि ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत देश के आखिरी गांवों को अब “पहला गांव” मानकर विकास किया जा रहा है ताकि वहां से पलायन रुके और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले।
इसके साथ ही, सीमावर्ती जिलों में हो रहे असामान्य जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता जताते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने इसके अध्ययन के लिए एक ‘डेमोग्राफी मिशन’ शुरू किया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि घुसपैठ के कारण आबादी के संतुलन में आ रहे किसी भी बदलाव की जानकारी जमीनी स्तर से लेकर उच्च स्तर तक तुरंत रिपोर्ट की जानी चाहिए।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)

