Tuesday, October 20, 2026
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राम मंदिर दान विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग, केजरीवाल ने मांगी पारदर्शिता

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नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान राशि से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की प्रक्रिया और कानूनी आधार को लेकर सवाल उठाए हैं।

केजरीवाल ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में जांच पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह होनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि यदि मामले में अभी तक कोई औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है, तो जांच दल किस कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रहा है।

AAP प्रमुख ने कहा कि किसी भी वित्तीय अनियमितता की जांच में कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सर्वोपरि होता है। उन्होंने मांग की कि जांच से संबंधित तथ्यों और प्रक्रियाओं को सार्वजनिक किया जाए ताकि लोगों के मन में किसी प्रकार की शंका या भ्रम की स्थिति न बने।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर में आने वाली दान राशि केवल आर्थिक विषय नहीं है, बल्कि यह देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा हुआ विषय है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

सरकार ने जांच प्रक्रिया को बताया नियमसम्मत

वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच प्रक्रिया को पूरी तरह नियमों के अनुरूप बताया है। सरकार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय SIT विभिन्न दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों से प्राप्त जानकारियों की समीक्षा कर रही है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार जांच का उद्देश्य तथ्यों का निष्पक्ष सत्यापन करना है और अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं का गहन परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया किसी पूर्वाग्रह के बिना आगे बढ़ रही है।

विपक्ष और सरकार आमने-सामने

मामले को लेकर विपक्ष लगातार जांच की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार निष्पक्ष और तथ्याधारित जांच का दावा कर रही है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब सभी की नजरें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक आस्था और सार्वजनिक विश्वास से जुड़े मामलों में पारदर्शी जांच न केवल तथ्यों को सामने लाती है, बल्कि संस्थाओं के प्रति जनता के भरोसे को भी मजबूत करती है। ऐसे में राम मंदिर दान मामले की जांच आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।

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