देशनोक। छत्तीसगढ़ से राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा पर पहुंचे भगतों ने ओसियां से लेकर देशनोक तक विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान श्रद्धालुओं ने माँ करणी, माँ माजीसा और बाबा रामदेव के दरबार में शीश नवाकर देशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। धार्मिक यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ के भगतों ने राजस्थान की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़ने का अवसर प्राप्त किया।
यात्रा की शुरुआत ओसियां धाम से हुई। यहां भगतों ने माता सच्चियाय के मंदिर में दर्शन किए और गणेशजी, हनुमानजी, भैरूनाथजी सहित नौ देवियों के समक्ष पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने परिवार, समाज और देश में सुख-शांति की प्रार्थना की। ओसियां में ही जूनी गादी के नाम से प्रसिद्ध रानी भटियानी सा, संवाइंसिंह दाता और लाल बन्ना सा के भी दर्शन किए गए।
बाबा रामदेव की संध्या आरती में निभाई सहभागिता
ओसियां धाम के दर्शन के बाद छत्तीसगढ़ से आए भगतों का दल रामदेवरा पहुंचा। यहां बाबा रामदेव के मंदिर में संध्या आरती में श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। आरती और पूजा-अर्चना के बाद दल जैसलमेर मार्ग से जोगीदासधाम के लिए रवाना हुआ।
जोगीदासधाम को माँ माजीसा का मायका माना जाता है। यहां माँ माजीसा की भुआसा के रूप में श्रद्धा और आस्था के साथ पूजा की जाती है। भादों शुक्ल पक्ष की सप्तमी के अवसर पर माँ स्वरूपकंवर बाईसा यानी माजीसा माँ के अवतरण दिवस से जुड़े धार्मिक आयोजन में छत्तीसगढ़ से पहुंचे सेवकों ने भी हिस्सा लिया।
माजीसा माँ के अवतरण स्थल पर की पूजा-अर्चना
माँ माजीसा के 338वें जन्मोत्सव के अवसर पर छत्तीसगढ़ से पहुंचे भगतों ने जोगीदासधाम में आयोजित पूजा-अर्चना में सहभागिता की। इसके बाद दल बाड़मेर पहुंचा, जहां माजीसा धाम में दर्शन किए और प्रसादी ग्रहण की।
इसके बाद श्रद्धालु जसोलधाम पहुंचे। जसोल को रानी भटियानी सा की ससुराल के रूप में माना जाता है। यहां श्रद्धालुओं ने संध्या आरती में भाग लिया और अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
देशनोक पहुंचकर माँ करणी के दरबार में नवाया शीश
जसोलधाम से यात्रा का अगला पड़ाव देशनोक रहा। यहां विश्व प्रसिद्ध श्री करणी माता मंदिर पहुंचकर छत्तीसगढ़ के भगतों ने माँ करणी के दर्शन किए। संध्या आरती में शामिल होने के साथ ही अगले दिन नवमी तिथि पर आयोजित कार्यक्रम में भी श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई।
माँ करणी के दरबार में भगतों ने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली के लिए प्रार्थना की। धार्मिक यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने राजस्थान के अलग-अलग धामों में दर्शन कर अपनी आस्था और परंपरा से जुड़ने का अनुभव प्राप्त किया।
राजोद गांव में भी लिया आशीर्वाद
देशनोक से दर्शन के बाद छत्तीसगढ़ से आए भगतों का दल नागौर जिले के जायल तहसील अंतर्गत राजोद गांव पहुंचा। यहां सेना से सेवानिवृत्त कप्तान सज्जन सिंह के निवास पर दर्शन और प्रसादी का कार्यक्रम हुआ।
कप्तान सज्जन सिंह माँ करणी को अपना इष्ट मानते हैं, जबकि उनकी जीवनसंगिनी भंवरकंवर बाईसा माँ माजीसा को अपना इष्ट मानती हैं। यहां श्रद्धालुओं ने दर्शन कर प्रसादी ग्रहण की और इसके बाद वापसी की यात्रा के लिए रवाना हुए।
वीरेन्द्र सिंह तोमर का मिला विशेष सहयोग
पूरी धार्मिक यात्रा में क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष तथा किसान नेता वीरेन्द्र सिंह तोमर का विशेष सहयोग रहा। उनकी ओर से माँ करणी और बाबा रामदेव के दरबार में देशवासियों की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की गई।
छत्तीसगढ़ से राजस्थान तक हुई यह धार्मिक यात्रा श्रद्धा, सेवा और परंपरा से जुड़ी रही। यात्रा में शामिल भगतों ने विभिन्न धार्मिक स्थलों पर दर्शन कर आशीर्वाद लिया और धार्मिक आयोजनों में सहभागी बने।

