दुर्ग:
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को एक महिला दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी की सैलरी का 84 प्रतिशत हिस्सा अपने बेटे के खाते में ट्रांसफर करवाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत बाद, उन्हें मुचलके पर रिहा कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला विश्वविद्यालय में कार्यरत अर्द्धकुशल दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शुभांगी मराठे से जुड़ा है। आरोप है कि कुलसचिव अपनी पद का धौंस जमाते हुए महिला को नौकरी से निकालने की धमकी देते थे और उस पर मानसिक दबाव बनाते थे। जैसे ही महिला का वेतन उसके खाते में आता था, उसका अधिकांश हिस्सा कुलसचिव द्वारा अपने बेटे के बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिया जाता था। इसके अलावा, महिला से अपने घर का खाना बनवाने का भी गंभीर आरोप लगा है।
जांच समिति के खुलासे और बैंक रिकॉर्ड
मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति के निर्देश पर एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने महिला के बैंक स्टेटमेंट और 35 पन्नों के डिजिटल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की।
जांच रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े:
- वेतन अवधि: फरवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच।
- कुल वेतन: महिला को इस दौरान कुल 1,77,137 रुपये वेतन के रूप में मिले।
- अवैध ट्रांसफर: इसमें से कुल 1,49,384 रुपये (करीब 84.3%) सीधे कुलसचिव के बेटे के खाते में ट्रांसफर कराए गए।
- भुखमरी जैसे हालात: कलेक्टर दर के हिसाब से महिला को हर महीने लगभग 11,515 रुपये मिलते थे, लेकिन इस अवैध उगाही के बाद उसके पास घर चलाने के लिए केवल 2,000 रुपये के आसपास ही बचते थे।
पुलिस कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन तमाम आरोपों को प्रथम दृष्टया पूरी तरह सही पाया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक के सख्त निर्देशों पर मोहन नगर थाना पुलिस ने आरोपी कुलसचिव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(4) के तहत औपचारिक मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस इस पूरे प्रकरण की आगे की जांच में जुटी है, वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन भी इस रिपोर्ट के आधार पर प्रशासनिक और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है।

