नई दिल्ली: आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद परिसर में देर रात तक विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों और छात्रों की चिंताओं को सरकार लगातार नजरअंदाज कर रही है। इसी के विरोध में उन्होंने संसद परिसर में रातभर धरना देकर सरकार पर जवाबदेही तय करने का दबाव बनाने की कोशिश की।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि देशभर के लाखों छात्र लगातार परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों से परेशान हैं। उनका आरोप है कि इन समस्याओं के बावजूद केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय कोई ठोस कदम उठाने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर है तो सबसे पहले शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
धरने के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य संसद की कार्यवाही में बाधा डालना नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं की आवाज़ को सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों और पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा दिया है। कई वर्षों की मेहनत करने वाले छात्रों का विश्वास व्यवस्था से उठता जा रहा है, लेकिन सरकार इस संकट को स्वीकार करने के बजाय विपक्ष और प्रदर्शनकारियों की आवाज़ दबाने में लगी हुई है।
संसद परिसर में उनके धरने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। सुरक्षा कर्मी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रहे और संसद परिसर में आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों की निगरानी की गई। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि लोकतंत्र में जनता के प्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे उन लोगों की आवाज़ बनें, जिनकी समस्याएं लंबे समय से अनसुनी की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों, युवाओं और बेरोजगारों से जुड़े मुद्दे केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं हैं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़े प्रश्न हैं। इसलिए सरकार को इन मुद्दों पर संवेदनशीलता दिखाते हुए ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)

