Thursday, September 24, 2026
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पोरा तिहार पर वीरेन्द्र सिंह तोमर ने दी बधाई, पशु प्रेम और कृतज्ञता का संदेश

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकपर्व पोरा तिहार (पोला) के अवसर पर क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष तथा किसान नेता वीरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी। उन्होंने कहा कि पोरा तिहार केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि खेती-किसानी, पशुधन और किसानों के जीवन में बैलों के महत्वपूर्ण योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की छत्तीसगढ़ी परंपरा है।

वीरेन्द्र सिंह तोमर ने इस अवसर पर पशु प्रेम और पशुओं के प्रति आभार की भावना को समाज में मजबूत करने का संदेश दिया। उन्होंने गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग के समर्थन की बात भी कही।

खेती-किसानी और पशुधन के सम्मान का पर्व है पोरा

छत्तीसगढ़ में पोरा तिहार का विशेष सांस्कृतिक और ग्रामीण महत्व है। यह पर्व हर वर्ष भाद्रपद मास की अमावस्या यानी पिठोरी अमावस्या के दिन मनाया जाता है। ग्रामीण अंचलों में यह त्योहार विशेष उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।

पोरा तिहार मुख्य रूप से खेती-किसानी और बैलों के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व माना जाता है। किसान परिवारों के लिए बैल कृषि कार्यों में लंबे समय से महत्वपूर्ण साथी रहे हैं। इसी योगदान के सम्मान में इस दिन बैलों को विशेष रूप से सजाया और उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।

पोरा के दिन बैलों को दिया जाता है विश्राम

पोरा तिहार की एक खास परंपरा यह है कि इस दिन बैलों से किसी भी प्रकार का कृषि कार्य नहीं कराया जाता। उन्हें पूरे दिन आराम दिया जाता है और स्नान कराने के बाद उनका श्रृंगार किया जाता है। किसान और ग्रामीण परिवार श्रद्धा के साथ बैलों की पूजा करते हैं।

कई स्थानों पर बैल दौड़ जैसे पारंपरिक आयोजनों का भी आयोजन किया जाता है। वहीं बच्चों के बीच मिट्टी के बैलों से खेलने की परंपरा भी पोरा तिहार की लोक संस्कृति का हिस्सा है।

घरों में बनते हैं पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पकवान

पोरा तिहार केवल पशुधन के सम्मान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और खान-पान से भी जुड़ा पर्व है। इस अवसर पर घरों में कई तरह के पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाए जाते हैं।

इस दिन ठेठरी, खुरमी, चीला सहित कई पारंपरिक पकवान तैयार किए जाते हैं। परिवार और रिश्तेदार मिलकर त्योहार की खुशियां साझा करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस पर्व का उत्साह विशेष रूप से देखने को मिलता है।

पशु प्रेम और कृतज्ञता का संदेश देता है पोरा तिहार

वीरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि पोरा तिहार हमें यह याद दिलाता है कि खेती-किसानी में पशुधन का योगदान कितना महत्वपूर्ण रहा है। बैल सदियों से किसानों के जीवन और कृषि व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में कृषि के तौर-तरीकों में बदलाव आया है, लेकिन पशुओं के प्रति सम्मान और संवेदना की भावना को बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। पोरा तिहार इसी पशु प्रेम, सेवा और कृतज्ञता की भावना को आगे बढ़ाने वाला पर्व है।

छत्तीसगढ़ के साथ कई राज्यों में मनाया जाता है पोला

पोरा या पोला पर्व केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और कर्नाटक सहित कई राज्यों में भी अलग-अलग परंपराओं और स्थानीय स्वरूपों के साथ यह पर्व मनाया जाता है।

कई क्षेत्रों में बैलों को सजाकर उनकी पूजा की जाती है और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। बच्चों के लिए मिट्टी के बैलों की परंपरा भी इस त्योहार के सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है।

प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

किसान नेता वीरेन्द्र सिंह तोमर ने पोरा तिहार के अवसर पर छत्तीसगढ़वासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि ऐसे पारंपरिक पर्व हमारी संस्कृति और ग्रामीण जीवन से जुड़े मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम करते हैं।

उन्होंने प्रदेशवासियों से पोरा तिहार को पशुधन के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता के भाव के साथ मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों और पशुओं के बीच सदियों पुराने रिश्ते को समझना और उसका सम्मान करना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है।

पोरा तिहार के इस पावन अवसर पर वीरेन्द्र सिंह तोमर ने समस्त छत्तीसगढ़वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और प्रदेश में सुख-समृद्धि की कामना की।

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