बेंगलुरु: कर्नाटक कांग्रेस में हालिया राजनीतिक हलचल के बीच पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक मंच से फटकार लगाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। इस विवाद के बीच अब कर्नाटक सरकार में मंत्री और खरगे के पुत्र प्रियांक खरगे ने अपने पिता के कदम का खुलकर समर्थन किया है।
एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार नारेबाजी किए जाने पर मल्लिकार्जुन खरगे ने मंच से ही नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को अनुशासन बनाए रखने की नसीहत देते हुए कार्यक्रम की गरिमा का सम्मान करने को कहा था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि किसी भी राजनीतिक संगठन में अनुशासन बनाए रखना नेतृत्व की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। उनके अनुसार, यदि कोई कार्यकर्ता कार्यक्रम की मर्यादा या संगठनात्मक व्यवस्था को प्रभावित करता है, तो पार्टी अध्यक्ष को हस्तक्षेप करने और आवश्यक निर्देश देने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना को विवाद के रूप में देखने के बजाय संगठनात्मक अनुशासन के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। प्रियांक खरगे ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व हमेशा पार्टी की एकजुटता और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक कांग्रेस में विभिन्न नेताओं के समर्थकों के बीच शक्ति प्रदर्शन की चर्चाएं लगातार होती रही हैं। ऐसे में मल्लिकार्जुन खरगे का संदेश यह संकेत देता है कि पार्टी नेतृत्व किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या गुटीय प्रदर्शन को बढ़ावा देने के पक्ष में नहीं है।
प्रियांक खरगे के बयान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस आलाकमान संगठनात्मक अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है और पार्टी कार्यक्रमों में मर्यादा बनाए रखने को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।