तेलंगाना में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास और फंडिंग को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव बेहद तीखा हो गया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सोमवार को केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मुख्यमंत्री का दावा है कि केंद्र सरकार जानबूझकर प्रशासनिक अड़चनें पैदा कर 122 किलोमीटर लंबे हैदराबाद मेट्रो फेज-2 प्रोजेक्ट को रोकने की कोशिश कर रही है।
बीआरएस शासन में बढ़ी लागत, एलएंडटी ने खींचे थे हाथ
परियोजना के इतिहास पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि कांग्रेस के नेतृत्व में शुरू हुई इस पहल में पिछली बीआरएस (BRS) सरकार के दौरान भारी देरी हुई, जिससे प्रोजेक्ट की लागत ₹15,000 करोड़ से बढ़कर ₹22,000 करोड़ हो गई थी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद इस विस्तार कार्य में तेजी लाने के प्रयास शुरू किए गए। हालांकि, मेट्रो की मूल पार्टनर कंपनी एलएंडटी (L&T) ने वित्तीय रूप से व्यावहारिक न होने का हवाला देते हुए फेज-2 में शामिल होने से इनकार कर दिया। इस गतिरोध को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने ₹15,000 करोड़ में एलएंडटी के मेट्रो एसेट्स (संपत्ति) को खुद अधिग्रहित करने का फैसला किया।
जापान से मिला सस्ता लोन, लेकिन ट्रांसफर पर लगी रोक
सीएम रेवंत रेड्डी ने बताया कि कर्ज के बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकार ने एक जापानी संस्था से 4% की बेहद प्रतिस्पर्धी ब्याज दर पर ₹13,600 करोड़ का लोन मंजूर कराया है। यह पुरानी ब्याज दरों (8.25% – 11.5%) के मुकाबले काफी कम है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, > “जापानी संस्था ने फंड जारी कर के आईआरएफसी (IRFC) को ट्रांसफर कर दिया है, लेकिन इसे राज्य सरकार तक पहुंचने से रोका जा रहा है।”
केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी पर साजिश का आरोप
मुख्यमंत्री ने सिकंदराबाद के सांसद और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वह केंद्रीय मंत्रियों पर दबाव बना रहे हैं ताकि यह फंड जारी न हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि किशन रेड्डी हैदराबाद के विकास को बाधित करने के लिए बीआरएस नेताओं के साथ मिलकर साजिश रच रहे हैं।
मुख्यमंत्री का केंद्र को अल्टीमेटम
रेवंत रेड्डी ने साफ किया कि राज्य सरकार ने रिजर्व बैंक (RBI) समेत सभी जरूरी मंजूरियां और प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अल्टीमेटम देते हुए पूछा कि जो शहर उन्हें चुनकर भेजता है, वह उसी के विकास में बाधा क्यों बन रहे हैं?
- केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह इस 122 किमी के विस्तार में राज्य की साझीदार बनेगी या नहीं?
- यदि केंद्र को हमारे साथ साझेदारी करने में दिक्कत है, तो वह तुरंत एनओसी (NOC – अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी करे।
- राज्य सरकार इस पूरे मेट्रो विस्तार का खर्च खुद उठाने और इसे अकेले पूरा करने के लिए तैयार है।