नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो कथित तौर पर अस्पताल की आड़ में नवजात बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त का कारोबार चला रहा था। इस कार्रवाई में डॉक्टर सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पांच नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचाया गया है।
दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट टीम की जांच में सामने आया कि रोहिणी स्थित एक निजी अस्पताल से पूरे नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था। आरोप है कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से नवजात बच्चों को हासिल कर उन्हें ऐसे दंपतियों तक पहुंचाता था, जो कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया से बचना चाहते थे।
पुलिस के मुताबिक, बच्चों को पहले अस्पताल में रखा जाता था और फिर उनकी “डील” खरीदारों की आर्थिक क्षमता के अनुसार तय की जाती थी। जांच के दौरान अस्पताल के मालिक डॉक्टर विवेक समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि नेटवर्क का फैलाव दिल्ली के अलावा राजस्थान और मध्य प्रदेश तक था। पाली, ग्वालियर और अन्य शहरों से नवजात शिशुओं को लाकर अस्पताल में रखा जाता था। बरामद किए गए पांच बच्चों में चार लड़के और एक लड़की शामिल हैं। इनमें एक शिशु की उम्र महज दो दिन बताई जा रही है।
पुलिस को शक है कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और डे-केयर सुविधा की आड़ में बच्चों को छिपाकर रखा जाता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, एजेंटों और संभावित खरीदारों की पहचान में जुटी हैं।
फिलहाल सभी बच्चों को सुरक्षित संरक्षण में रखा गया है और उन्हें जल्द ही बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया जाएगा। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।