Monday, June 22, 2026
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ईरान-अमेरिका शांति समझौते में भारत कहीं नहीं: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कूटनीति पर उठाए सवाल

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  • ईरान-अमेरिका शांति समझौते का कांग्रेस ने किया स्वागत, लेकिन भारत की भूमिका पर जताई चिंता।
  • पवन खेड़ा का दावा: पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और तुर्की की मध्यस्थता से हुआ समझौता; भारत रहा ‘गायब’।
  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पुराने बयानों और सरकार की वैश्विक रणनीति पर तीखा हमला।

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते को लेकर देश में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने इस पूरे मामले में भारत की राजनयिक (diplomatic) प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस बड़े वैश्विक घटनाक्रम और शांति प्रयासों से नई दिल्ली पूरी तरह से ‘गायब’ रही।

“हम केवल मूकदर्शक बनकर रह गए”

सोमवार को जारी एक बयान में पवन खेड़ा ने ईरान-अमेरिका शांति समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह उन सभी के लिए राहत की बात है जो शांति की कीमत समझते हैं। हालांकि, उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि यह समझौता पश्चिम एशिया—विशेषकर ईरान और लेबनान—में भारी तबाही, तबाही और मासूमों की जान जाने के बाद हुआ है।

सरकार को घेरते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा:

विदेश मंत्री के बयानों पर साधा निशाना

पवन खेड़ा ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर पर भी तीखा तंज कसा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थता (mediation) के विचार को खारिज किया है और इसे बेहद हल्के तौर पर लिया। उन्होंने कहा कि इसी कूटनीतिक दृष्टिकोण की वजह से आज भारत एक “मूकदर्शक” बनकर रह गया है।

पाकिस्तान की वैश्विक छवि सुधरने का दावा

कांग्रेस नेता ने संप्रग (UPA) सरकार के दौर का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भारत की मजबूत कूटनीति के कारण पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ‘ग्रे लिस्ट’ में डाला गया था। लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। खेड़ा ने दावा किया, “जिस पाकिस्तान को हम आतंकवाद फैलाने के लिए वैश्विक मंचों पर बेनकाब करते थे, आज उसने खुद को वैश्विक स्थिरता और शांति के पैरोकार (stakeholder) के रूप में स्थापित कर लिया है, जबकि भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर अपनी जमीन खो दी है।”

“कमजोर होकर उभरा भारत”

पवन खेड़ा ने कहा कि हालांकि यह युद्ध भारत का नहीं था, लेकिन इसके बावजूद इस पूरे घटनाक्रम से भारत की वैश्विक साख कमजोर हुई है। उन्होंने तंज कसते हुए अपने बयान का अंत “मोदी है तो मुमकिन है!” के नारे के साथ किया।

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