Saturday, June 20, 2026
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छत्तीसगढ़ में शिक्षा को लेकर सियासी संग्राम, स्कूलों की नई व्यवस्था पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

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रायपुर, 15 जून: छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में नैतिक शिक्षा, प्रार्थना और महापुरुषों की जीवनियों के अध्ययन से जुड़े नए निर्देश जारी किए जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी नई व्यवस्था के तहत 16 जून से सरकारी स्कूलों की प्रार्थना सभाओं में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत के साथ विभिन्न प्रेरणादायी मंत्रों और देश के महान व्यक्तित्वों की जीवनियों के वाचन का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना है।

हालांकि, कांग्रेस ने इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए इसे शिक्षा के राजनीतिकरण से जोड़ दिया है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में वैचारिक हस्तक्षेप कर रही है और सरकारी स्कूलों को एक विशेष विचारधारा की ओर मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

विवाद के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कांग्रेस के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के विचारों और भारतीय संस्कृति से जुड़े मूल्यों को बच्चों तक पहुंचाना किसी भी तरह से गलत नहीं माना जा सकता। मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ऐसे प्रयासों का विरोध कर समाज और संस्कृति से जुड़े सकारात्मक विषयों पर भी राजनीति कर रही है।

मंत्री यादव ने यह भी कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधारों पर काम कर रही है। उनके अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप स्कूलों में आधुनिक तकनीक, स्मार्ट क्लास और नवाचार आधारित शिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि दूरस्थ क्षेत्रों में बंद पड़े स्कूलों को दोबारा संचालित करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में शिक्षकों की कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और कई स्कूलों की खराब स्थिति जैसे मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इन वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए सांस्कृतिक और वैचारिक बहस को आगे बढ़ा रही है।

फिलहाल शिक्षा से जुड़ा यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अपनी नई व्यवस्था को किस तरह लागू करती है और विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच किस रूप में उठाता है।

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